Current Affairs 2 October

1.सामने आया 65250 करोड़ का कला धन:-
काले धन को अहम चुनावी मुद्दा बनाकर सत्ता में आई मोदी सरकार को देश के भीतर छुपी काली कमाई को निकालने में बड़ी सफलता मिली है। 30 सितंबर को समाप्त आय घोषणा योजना (IDS) में भारी भरकम 65,250 करोड़ रुपये का काला धन उजागर हुआ है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि यह शुरुआती आंकड़ा है। जब सभी घोषित खातों की राशि की गणना हो जाएगी, तो काले धन का यह आंकड़ा बढ़ना तय है। माना जा रहा है कि काले धन की इस रकम पर टैक्स और जुर्माने के रूप में सरकारी खजाने में करीब 30,000 करोड़ रुपये आएंगे। यह राशि केंद्र सरकार की कई योजनाओं के सालाना बजट से अधिक है। वैसे, मोदी सरकार ने करीब ढाई साल के अपने कार्यकाल में अब तक 1,40,741 करोड़ रुपये घरेलू व विदेशी काले धन और अघोषित आय के रूप में पकड़ा है। जेटली ने शनिवार को ‘आय घोषणा योजना-2016’ के तहत हुए उजागर हुए काले धन की आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि 64,275 लोगों ने 65,250 करोड़ रुपये की काली कमाई की जानकारी दी है। यह राशि अब तक का एक रिकॉर्ड है। इससे पहले 1997 की स्वैछिक आय घोषणा योजना में मात्र 9,760 करोड़ रुपये के काले धन का पता चला था। खास बात यह है कि विदेश से ज्यादा  काला धन देश के भीतर छुपा मिला। सरकार ने पिछले साल विदेशी काला धन घोषित करने की योजना लांच की थी। इसमें तीन महीने के दौरान मात्र 644 लोगों ने 4,147 करोड़ रुपये की काले कमाई उजागर की थी। इससे सरकारी खजाने में सिर्फ 2,428 करोड़ रुपये ही आए थे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का कहना है कि आइडीएस में उजागर हुए काले धन से सरकार को करीब 30,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होगा। इसमें से आधी राशि यानी करीब 15,000 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष 2016-17 में मिलेंगे। शेष राशि अगले वित्त वर्ष में आने का अनुमान है। 
पीएम ने की तारीफ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आय घोषणा योजना की सफलता के लिए वित्त मंत्री और उनकी टीम की तारीफ की है। उन्होंने योजना को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले राजस्व सचिव हसमुख अढिया को बधाई दी। पीएम ने काला धन उजागर करने वालों की भी सराहना की। उन्होंने इसे अर्थव्यवस्था की वृद्धि और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम करार दिया।
पकड़ में आई काली कमाई
• 1,40,741 करोड़ काला धन व अघोषित आय मोदी सरकार ने दो साल में पकड़ी
• 8,000 करोड़ रुपये एचएसबीसी में विदेशी खातों में निकला काला धन
• 56,378 करोड़ ढाई साल में तलाशी और छापेमारी में पकड़ी अघोषित आय
• 4,127 करोड़ की काली कमाई उजागर हुई थी विदेशी काले धन की योजना में
• 1,986 करोड़ रुपये तलाशी व छापेमारी के दौरान बीते ढाई साल में किया जब्त
• 5,000 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता आइसीआइजे द्वारा उजागर विदेशी खातों में लगा
• 65,250 करोड़ रुपये का काला धन सामने आया आय घोषणा योजना में
2. दो दशक में 15 गुना बढ़ा काला धन :-
देश में काले धन का कोई ठोस आंकड़ा सरकार कभी तैयार नहीं कर पाई। इसके लिए कई एजेंसियों को भी लगाया गया, मगर नतीजा सिफर रहा है। हां, अगर आइडीएस के आंकड़ों की दो दशक पूर्व की वीडीआइस से तुलना करें तो यह कहा जा सकता है कि पिछले 20 वर्षो में देश में काला धन करीब 15 गुना बढ़ा है। वर्ष 1997 में तत्कालीन संयुक्त मोर्चा सरकार ने स्वैछिक आय घोषणा योजना (VIDS) लागू की थी। इसके तहत कुल 9,760 करोड़ रुपये का काला धन सामने आया था। तब 4.75 लाख लोगों ने स्कीम के तहत काली कमाई की घोषणा की थी। इसके मुकाबले शुक्रवार को समाप्त आय घोषणा योजना (आइडीएस) के तहत 64,275 लोगों ने 65,250 करोड़ रुपये की काली कमाई उजागर की है। इस तरह वर्ष 1997 की स्कीम में हर व्यक्ति ने औसतन सात लाख रुपये की काली कमाई घोषित की।  वहीं, इस वर्ष की स्कीम के तहत हर व्यक्ति ने औसतन एक करोड़ रुपये से थोड़ी यादा की काली कमाई की जानकारी दी है। इस हिसाब से सरकार के सामने हर व्यक्ति ने अपने पास पहले जितनी मात्र में काला धन बताया था, उसकी राशि में अब 15 गुना की बढ़ोतरी हो चुकी है। पिछली संप्रग सरकार ने वर्ष 2011 में संसद में काले धन पर श्वेत पत्र पेश किया था। उसमें भी देश में कितना काला धन है, इसके बारे में कोई आकलन नहीं था। बाद में तीन एजेंसियों- एनसीईएआर, एनआइपीएफपी और एनआइएफएम को काला धन का आकलन करने और इसे रोकने के उपाय सुझाने का काम दिया गया था। इन तीनों की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है, मगर किसी ने भी देश में छिपे काले धन के आकार के बारे में कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं दिया है। वैसे, स्विट्जडरलैंड सरकार की 2012 की रिपोर्ट बताती है कि उनके बैंकों में भारतीयों का जमा धन महज दो अरब डॉलर का ही है। बाबा रामदेव ने 2011 में जब काले धन के खिलाफ अभियान शुरू किया था, तब उन्होंने दावा किया था कि देश-विदेश में भारतीयों के पास 400 लाख करोड़ रुपये का काला धन छिपा हुआ है।
3. पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबंदी होगी तेज:- पाकिस्तानी हुक्मरान अगर यह समझ रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक करने और सार्क बैठक को रद करवाने के बाद भारत अब उस पर दवाब बनाने के लिए कोई और कदम नहीं उठाएगा तो वे पूरी तरह से मुगालते में हैं। पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबंदी के लिए भारत और भी कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें एक है ईरान और अफगानिस्तान के साथ मिल कर नया आर्थिक ब्लॉक बनाना। इसमें बांग्लादेश और श्रीलंका समेत दक्षिण एशिया के कुछ और देशों को भी शामिल किया जा सकता है। चाबहार आर्थिक क्षेत्र के बारे में इसी हफ्ते भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच शुरुआती बातचीत हुई है। इसी बैठक में भारत की तरफ से यह प्रस्ताव किया गया है कि तीनों देश मिल कर एक नए आर्थिक क्षेत्र के गठन की दिशा में कदम उठा सकते हैं। बाद में इसमें कुछ मध्य और दक्षिण एशियाई देशों को भी जोड़ सकते हैं। इस पर सहमति बनने के बाद यह फैसला हुआ है कि इस समूह को लेकर जल्द ही एक बैठक दिल्ली में की जाएगी। आतंक के मुद्दे पर जिस तरह से दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (SAARC ) के सदस्य देशों ने भारत का साथ दिया और पाकिस्तान में होने वाली सार्क शिखर बैठक का बहिष्कार किया है उसे देखते हुए भारत को भरोसा है कि बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल समेत कई देश इस नए संगठन में शामिल हो सकते हैं।यही नहीं अफगानिस्तान को साथ लेकर भारत पाकिस्तान को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में खींचने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। इसके लिए भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय कारोबार के लिए रास्ता नहीं देने का मुद्दा उठाया जाएगा। डब्ल्यूटीओ के सदस्य होने के नाते पाकिस्तान का यह फर्ज है कि वह भारत और अफगानिस्तान को जमीन मार्ग से कारोबार करने के लिए एक कॉरिडोर उपलब्ध कराए। लेकिन वह अभी सिर्फ अफगानिस्तान को भारत समान भेजने के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने देता है। भारत को इसकी इजाजत नहीं देता है। इस वजह से भारत तकरीबन दो लाख टन गेहूं अफगानिस्तान नहीं भेज पा रहा है। कई बार पाकिस्तान से मानवीय आधार पर इसकी मांग की गई लेकिन वहां के हुक्मरानों का दिल नहीं पसीजा है। बहरहाल, भारत समुद्री मार्ग से अफगानिस्तान को गेहूं भेजने की व्यवस्था कर रहा है। पाकिस्तान के लिए यह भी काफी बेचैनी की बात है कि अफगानिस्तान के विषय पर हार्ट ऑफ एशिया नाम से होने वाली बैठक अमृतसर में होने वाली है। इस बैठक का उद्घाटन अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी करेंगे। बैठक में 14 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कई देशों के विदेश मंत्रियों के इसमें शामिल होने की संभावना है।  सनद रहे कि भारत को शुक्रवार को तब एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली जब इस्लामाबाद में नवंबर में होने वाली सार्क शिखर बैठक को पाकिस्तान को रद्द करना पड़ा। आतंक के मुद्दे पर सार्क के अधिकांश देश मसलन भारत, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका ने इस बैठक का बहिष्कार किया था।
4. संयुक्त राष्ट्र ने कहा बातचीत से मतभेद सुलझाएं भारत-पाक:-
भारत और पाकिस्तान का मसला अब संयुक्त राष्ट्र पहुंच गया है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके अधिकार क्षेत्र में भारत ने कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की। जबकि भारत ने कहा है कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र का सहयोग नहीं कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से अपने मतभेद बातचीत के जरिये खत्म करने के लिए कहा है। कहा है, बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाए जिससे मौजूदा तनाव की स्थिति खत्म हो। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से मिलकर पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कहा कि उनका देश अधिकतम संयम बरत रहा है लेकिन भड़कावे की हरकतों को यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं कर सकता। भारत सर्जिकल स्ट्राइक का जो दावा कर रहा है, वह पूरी तरह से झूठा है। इलाके में तनाव बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी भारत की है। वह कश्मीर मुद्दे से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए यह सब कर रहा है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक के बयान को खारिज करते हुए कहा, सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर जमीनी हकीकत बदल नहीं सकती, भले ही कोई उसे स्वीकार करे या नहीं। सचाई हमेशा बनी रहती है, चाहे उसे कोई माने या नहीं। डुजारिक ने अपने जम्मू-कश्मीर के पर्यवेक्षक दल के हवाले से कहा था कि उसे सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी नहीं है। अकबरुद्दीन ने कहा, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र को सही स्थिति की जानकारी नहीं दे रहा है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव मून ने कहा है कि दोनों देश बातचीत के जरिये अपने सभी मतभेद सुलझाएं। कोई अड़चन आने पर उनका कार्यालय मदद के लिए तैयार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव पर चिंता जाहिर की है और मध्यस्थता करने का प्रस्ताव किया है।
5. माली में भारत ने लिखी दोस्ती की नई इबारत:- अफ्रीका में अपनी पैठ बढ़ाने और यहां के देशों से सहयोग-संपर्क तेज करने की भारत की पहल को शुक्रवार को तब और गति मिली, जब पश्चिम अफ्रीका के सबसे बडे देश माली की नेशनल असेंबली (संसद) को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने संबोधित किया। माली ने भारतीय अतिथि की यात्र को विशेष महत्व दिया और इसी के चलते सत्रवसान के बीच एक दिन के लिए नेशनल एसेंबली का सत्र बुलाया और वह भी शुक्रवार के दिन। उपराष्ट्रपति के संबोधन के बाद फिर से सदन के सत्रवसान की घोषणा कर दी गई। किसी उच पदस्थ भारतीय नेता ने पहली बार माली की यात्र की है। माली सोने का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यहां तमाम खनिज भी प्रचुर मात्र में हैं।उपराष्ट्रपति अंसारी ने माली की राजधानी बमाको में नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए भारत-अफ्रीका की दोस्ती का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने कुछ समय पहले दिल्ली में आयोजित भारत-अफ्रीका सम्मेलन का हवाला भी दिया। हामिद अंसारी ने माली के आर्थिक-सामाजिकविकास के प्रति भारत के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने भारत की पहल वाले सोलर एलायंस में भागीदार बनने और योग दिवस को स्वीकृति देने के लिए माली के नेताओं का आभार जताया। आतंकवाद की आंच ङोल रहे माली की संसद में उपराष्ट्रपति ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, ‘हम भी सीमापार आतंक का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को लेकर साझा पहल पर जोर दिया। इसी क्रम में अंसारी ने माली के मशहूर शहर टिम्बक्टू में मजारों पर आतंकी हमले का उल्लेख किया। उन्होंने इस शहर के सांस्कृतिक स्वरुप के संरक्षण में माली सरकार को हर तरह का सहयोग प्रदान करने की पेशकश भी की। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी गुरुवार को माली की राजधानी बमाको पहुंचे थे।
6. न्यायपालिका को गैरजरूरी बोझ से मुक्ति दिलाए सरकार:- देश के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कानून मंत्रलय से ऐसे तंत्र पर विचार करने का अनुरोध किया है जो न्याय प्रणाली को अनावश्यक बोझ से मुक्ति दिला सके। अनावश्यक बोझ सरकार और उसके विभागों को कुछ फैसले लेने में बिलकुल उदासीन, लापरवाह या अक्षम बना देता है। मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से पूर्व न्यायाधीशों को शामिल करते हुए एक समिति भी गठित करने को कहा है। यह समिति तय करेगी कि जिस मुद्दे को अदालत के बाहर निपटाया जा सकता है तो उस स्थिति में किसी नागरिक के खिलाफ मामला लड़ा जा सकता है या नहीं। जस्टिस ठाकुर ने कहा, ‘मैं कानून मंत्री से आग्रह करना चाहूंगा कि न्याय प्रणाली को अनावश्यक बोझ से मुक्ति दिलाने वाले एक तंत्र पर विचार करें। ऐसा नहीं है कि हम उस बोझ को सहने के लिए तैयार नहीं है। इसका कारण यह है कि इससे सरकार फैसला लेने की स्थिति में उदासीन या अक्षम हो जाती है।’ मुख्य न्यायाधीश यहां राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (NALSA ) के थीम सांग की लांचिंग के मौके पर संबोधित कर रहे थे। विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत एनएएलएसए का गठन किया गया है। यह प्राधिकरण समाज के कमजोर तबके के लोगों को मुफ्त विधि सेवा मुहैया कराता है। जस्टिस ठाकुर ने कुछ ऐसे अनावश्यक मामलों का उल्लेख किया जिन्हें अदालत पहुंचने से पहले ही देखा जा सकता था। ऐसे मामलों को प्रशासनिक स्तर पर ही निपटाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि हमलोग न्याय करते हैं तो क्या सरकार भी ऐसा नहीं कर सकती है? आखिर हम क्यों नागरिक को अदालत जाने के लिए मजबूर करें?नई दिल्ली, प्रेट्र : देश के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कानून मंत्रलय से ऐसे तंत्र पर विचार करने का अनुरोध किया है जो न्याय प्रणाली को अनावश्यक बोझ से मुक्ति दिला सके। अनावश्यक बोझ सरकार और उसके विभागों को कुछ फैसले लेने में बिलकुल उदासीन, लापरवाह या अक्षम बना देता है।
7. 12 साल बाद रोसेटा का धूमकेतु अभियान खत्म:- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का धूमकेतु (कॉमेट) अभियान बारह साल बाद खत्म हो गया। रोसेटा यान को 67पी/चुरयुमोव-जेरासिमेंको नामक धूमकेतु की सतह पर सफलतापूर्वक क्रैश लैंडिंग करा दी गई। इससे पहले यान हाई रिजोल्यूशन ओसिरिस कैमरे से धूमकेतु की सबसे करीब से तस्वीरें लेने में सफल रहा। रोसेटा ने महज 20 मीटर की ऊंचाई से यह तस्वीरें ली हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक यह किसी भी यान द्वारा कॉमेट का अब तक का सबसे समीप से लिया गया फोटो है। इससे पहले 51 मीटर की ऊंचाई से तस्वीर ली गई थी। इन तस्वीरों के मदद से धूमकेतु की बनावट के बारे में पता लगाना आसान हो जाएगा। खासकर गैसीय संरचना, धूल-कण और प्लाजमा के बारे में यादा जानकारी मिलेगी। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में नई सूचनाएं मिल सकेंगी।  धूमकेतु के साथ चक्कर लगाने वाला रोसेटा यान सौर ऊर्जा से संचालित था। कॉमेट धीरे-धीरे बृहस्पति की कक्षा के साथ सूर्य से दूर जा रहा था। ऐसे में यान को चलायमान रखना संभव नहीं था। इसके अलावा सूर्य महीने भर के लिए पृथ्वी और रोसेटा के बीच आने वाला था। ऐसे में यान से संपर्क साधना मुश्किल हो जाता। रोसेटा को वर्ष 2004 में प्रक्षेपित किया गया था। यह 6 अगस्त, 2014 को धूमकेतु पर पहुंचा था